जमीन के पुराने सौदे से शुरू हुआ विवाद
बलिराम धरमानी के अनुसार, वर्ष 2018 में उन्होंने बोरड परिवार की लाभांडी स्थित लगभग 2.60 लाख वर्गफुट जमीन का सौदा किया था। इसमें से 40 हजार वर्गफुट जमीन की रजिस्ट्री उनके नाम हुई, जबकि बाकी जमीन का एग्रीमेंट किया गया था। परिवार के आपसी विवाद के कारण शेष जमीन की रजिस्ट्री नहीं हो सकी। आरोप है कि वर्ष 2022 में संदीप अग्रवाल ने जमीन की रजिस्ट्री कराने के बदले चार करोड़ रुपये की मांग की थी। बाद में धरमानी ने अपने नाम की 40 हजार वर्गफुट जमीन वापस बोरड परिवार को रजिस्ट्री कर दी और जमीन के सौदे व बयाने के एवज में कुल 3.15 करोड़ रुपये वापस प्राप्त किए। उनका दावा है कि इसके बाद कोई बकाया लेन-देन नहीं बचा था। इसके बावजूद उनसे चार करोड़ रुपये मांगे जा रहे थे।

होटल में बैठक के दौरान मारपीट का आरोप
शिकायत के मुताबिक, 24 सितंबर को नागेंद्र पांडेय ने धरमानी को कुबेर राठी से बात करने के लिए कहा। इसके बाद 26 सितंबर को आबिद हसन के कार्यालय में बैठक हुई, जहां चार करोड़ रुपये देने का दबाव बनाया गया। अगले दिन 27 सितंबर को धरमानी अपने मित्रों के साथ होटल वेलिंटन पहुंचे। वहां अनवर ढेबर, कुबेर राठी, आसिफ मेमन, विवेक जोशी, नागेंद्र पांडेय और संदीप अग्रवाल मौजूद थे। चार करोड़ रुपये मांगने का आधार पूछने और रकम देने से इनकार करने पर विवाद बढ़ गया। धरमानी ने आरोप लगाया है कि अनवर ढेबर और कुबेर राठी ने उनके साथ मारपीट की, जबकि अन्य लोगों ने उन्हें और उनके परिवार को जान से मारने की धमकी दी।

मित्र को भी दी गई उठाने की धमकी
शिकायत में 21 अक्टूबर की घटना का भी जिक्र है। धरमानी का आरोप है कि कुबेर राठी ने उनके मित्र आबिद हसन को बैठक के लिए बुलाया था। वहां आबिद को मामले से अलग रहने की चेतावनी देते हुए कहा गया कि वे बलिराम धरमानी से निपट लेंगे और उन्हें उठा लेंगे। इसके बाद धरमानी ने अपनी और परिवार की सुरक्षा को लेकर पुलिस से शिकायत की।

शोएब ढेबर भी 25 करोड़ की रंगदारी मामले में फरार
इस मामले के बीच अनवर ढेबर के बेटे शोएब ढेबर का नाम भी चर्चा में है। वह कांग्रेस नेता आनंद कुकरेजा से 25 करोड़ रुपये की कथित रंगदारी मांगने के मामले में फरार है। आरोप है कि लॉरेंस बिश्नोई और अमन साव गिरोह के नाम पर धमकी देकर रकम मांगी गई थी। रायपुर पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी पर 15 हजार रुपये का इनाम घोषित किया है। उसके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर भी जारी किया गया है और पुलिस की टीमें कई राज्यों में उसकी तलाश कर रही हैं।

38 दिन बाद स्नढ्ढक्र, गिरफ्तारी पर उठ रहे सवाल
इस मामले में पुलिस की कार्रवाई भी चर्चा में है। घटना 27 सितंबर को हुई थी, जबकि एफआईआर 4 नवंबर को दर्ज की गई। यानी शिकायत दर्ज होने में करीब 38 दिन का समय लगा। छह लोगों के नामजद होने के बावजूद गिरफ्तारी को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
गंज थाने में भारतीय न्याय संहिता की धारा 308(2), 351(3), 296, 115(2), 61(2) और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया गया है। जांच की जिम्मेदारी प्रधान आरक्षक देवेंद्र ध्रुव को सौंपी गई है।अब निगाहें पुलिस की अगली कार्रवाई पर हैं। देखना होगा कि कथित चार करोड़ रुपये की वसूली के इस मामले में जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और नामजद आरोपियों के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है।