सौरभ चंद्राकर को ओमान से प्रत्यर्पण के जरिए भारत लाया गया है। सोमवार को दिल्ली की राउज एवेन्यू अदालत में उसकी पेशी हुई थी, जहां अदालत ने सीबीआई को दो दिन की ट्रांजिट रिमांड प्रदान की थी। इसी आदेश के तहत जांच एजेंसी आरोपी को रायपुर लेकर आई है। दिल्ली की अदालत में सुनवाई के दौरान सौरभ चंद्राकर के अधिवक्ता ने ओमान की अदालत के आदेश का उल्लेख करते हुए सीबीआई की कार्रवाई पर आपत्ति दर्ज कराई। बचाव पक्ष का कहना था कि भारत सरकार की ओर से ओमान को भेजे गए प्रत्यर्पण अनुरोध में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से संबंधित मामले को स्वीकृति दी गई थी, जबकि सीबीआई के मामले में प्रत्यर्पण की अनुमति नहीं मिली थी।

अधिवक्ता ने दलील दी कि अंतरराष्ट्रीय प्रत्यर्पण के नियमों के अनुसार किसी आरोपी के विरुद्ध केवल उन्हीं मामलों में कानूनी कार्रवाई की जा सकती है, जिनके आधार पर उसका प्रत्यर्पण स्वीकृत हुआ हो। बचाव पक्ष ने सीबीआई की कार्रवाई को प्रत्यर्पण की शर्तों का उल्लंघन बताते हुए आरोपी को सीबीआई की हिरासत में दिए जाने का विरोध किया।